बवासीर के लक्षण

  • Feb 06 , 2017

पचास की उम्र के ऊपर लगभग पचास फीसदी वयस्कों में बवासीर के लक्षण देखे जाते हैं. बवासीर, ना सिर्फ आपको शारीरिक रूप से परेशान करता है बल्कि आपकी दिनचर्या को तबाह कर देता है. इसे लेकर आप समाज में, बोल-चाल के दौरान आपकी कई किस्म के मज़ाक सुनने को मिल जायेंगे. लेकिन, बवासीर जैसी गंभीर समस्या गहन गंभीरता की दरकार करती है. जैसे, आज के ज्यादातर रोग हमारी दिनचर्या की वजह से होते हैं, उसी तरह बवासीर के लिए अधिकांशतः हमारी आदतें जिम्मेदार हैं.

बवासीर क्या है? आपके मॉल-द्वार के पास नसों में सुजन आ जाती है जिससे कई बार मल त्याग के दौरान या स्वतः भी दर्द की अनुभूति होती है. बवासीर अंदरूनी और बाहरी दोनों प्रकार के होते हैं. अन्दुरुनी बवासीर मल-द्वार या रेक्टम के अन्दर वाले हिस्से में होता है और बाहरी बवासीर मल-द्वार के बहार होता है. इसमें आपको खुजली, दर्द तथा बैठने में तकलीफ होने लगती है.

बवासीर के कुछ ख़ास लक्षण इस प्रकार हैं-

  1. गुदा के आस-पास खुजली
  2. गुदा के आस-पास दर्द का अहसास
  3. गुदा के आस-पास सूजन जिससे आपको लगातार दर्द या खुजली होती हो
  4. मल त्याग के समय दर्द की अनुभूति
  5. मल-त्याग के दौरान खून का आना

बवासीर काफी दर्दनाक होता है, पर इसे उपचार से ठीक किया जा सकता है. कई बार ये अपने-आप भी ठीक हो जाता है. लेकिन इसके बढ़ने की भी संभावना रहती है.

बवासीर के कारणों में तीन-चार कारण अहम् हैं. अगर आपके परिवार में किसीको बवासीर है या था तो संभावना है की आप भी इससे पीड़ित हो सकते हैं. मतलब ये आनुवांशिक होता है. ये आपके दिनचर्या की वजह से भी हो सकता है. अगर आप दिन का हिस्सा ज्यादातर बैठ के निकालते हैं तो इसके होने खतरे बढ़ जाते हैं. अगर आपको बराबर कब्जियत की शिकायत रहती है तो बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है. मल-त्याग के समय अगर आपको विसर्जन के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है तो ये भी बवासीर के कारकों में से एक है.

इनके अलावा, ऐसे काम जिससे की आपके शरीर पर ज्यादा जोर पड़े, जैसे भारी सामान का उठाना या दिन का ज्यादा समय खड़े रहना या बैठना, इनसे भी बवासीर होने के कारण में इजाफा होता है. अगर आप नियमित रूप से गुदा-मैथुन करते हैं तो भी बवासीर होने की संभावना को न्योता दे रहे हैं. गर्भवती महिलाओं के लिए इससे ग्रसित होने का खतरा बढ़ जाता है. गर्भ के दौरान यूटेरुस के बढ़ने से कोलन पर नस का दबाव बढ़ जाता है, जिससे की मल-द्वार पर दबाव बन जाता है. मोटापा भी इसका एक बड़ा कारण है.

इसकी पहचान काफी आसान है. इसलिए, अगर ऊपर दिए गए किसी भी लक्षण से आपका शरीर वाकिफ है तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए.

इससे निपटने या परहेज़ के लिए आप अपनी दिनचर्या में कुछ बातों को शामिल कर सकते हैं. मसलन, दिन में ज्यादातर समय किसी एक ही स्थिति में ना बिताएं. अगर आपका काम बैठ कर करने वाला है तो इसे बात को सुनिश्चित करें की समय-समय पर उठ कर टहल लें. अपने दिनचर्या में थोडा खेल-खुद या कसरत शामिल करें. आहार में रफेज यानी की शाक-पात की मात्रा बढ़ाएं. कब्जियत से दूरी बनायें. बिना परेशानी मल-त्याग के लिए जरूरी है की आप अपने शरीर को समुचित मात्रा में पानी उपलब्ध कराएं. इन कुछ बातों का ख्याल रख आप बवासीर को खुद से दूर रख सकते हैं. अगर, इसके बावजूद आपको किसी कष्ट का अहसास हो रहा है तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें.